सांख्यिकीय पत्रिका नियोजन विभाग, उ.प्र. के अर्थ एवं संख्‍या प्रभाग द्वारा प्रकाशित एक महत्‍वपूर्ण वार्षिक प्रकाशन है। यह प्रकाशन विभाग के मण्‍डलीय उपनिदेशक, जिला अर्थ एवं संख्‍याधिकारी तथा विकास खण्‍ड स्‍तरीय कार्यालयों द्वारा किया जा रहा है। ग्राम, ग्राम पंचायत, विकास खण्‍ड, जनपद , मण्‍डल एवं राज्‍यस्‍तरीय आंकड़ों का संकलन एवं प्रकाशन विकास खण्‍ड, जिला एवं मण्‍डलीय सांख्यिकीय पत्रिकाओं के रूप में किया जाता है। इसमें विभिन्‍न स्‍तरों के लगभग 3500 मदों की सूचनाओं का संकलन है, इनका प्रदर्शन 100 से अधिक तालिकाओं/ उपतालिकाओं के रूप में किया जाता है।

             जिला सांख्यिकीय पत्रिका का प्रकाशन वर्ष 1976 से प्रतिवर्ष जिलावार किया जा रहा है । इसमें सम्मिलित की जाने वाली सूचनाओं में समय-समय पर आवश्‍यकतानुसार परिमार्जन, संवर्द्धन एवं संशोधन किया जाता रहा है। वर्तमान में सामाजिक तथा आर्थिक क्षेत्र के विभिन्‍न पहलुओं की सूचनायें प्रकाशित की जाती है। इसकी तालिका 1 में जनपद के आधारभूत आंकड़े, तालिका 2 (अ) एवं (ब) में जनपद के महत्‍वपूर्ण सामाजिक तथा आर्थिक संकेतक, तालिका 3(अ) में प्रमुख मदों के विकास खण्‍डवार संकेतक तथा तालिका 3(ब) में इन्‍हीं संकेतको को अवरोही क्रम में प्रकाशित किया जाता हैं। तालिका 4 से 62 तक में क्षेत्रफल एवं जनसंख्‍या, कृषि, कृषिगणना, पशुगणना, पशुपालन तथा मत्‍स्‍य, सहकारिता, उद्योग, सामान्‍य शिक्षा, सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य तथा परिवार कल्‍याण, विद्युत, परिवहन एवं संचार, संस्‍थागत वित्‍त, जल सम्‍पूर्ति, ग्रामीण एवं नगरीय फुटकर भाव तथा अन्‍य विविध विषयों के आंकड़े प्रकाशित किये जाते हैं। इसके अतिरिक्‍त तालिका 63(अ) में जनगणना सम्‍बन्‍धी नगरवार सूचनायें एवं 63 (ब) में जनपद के नगरों में विभिन्‍न सुविधाओं की उपलब्‍धता की स्थिति प्रकाशित की जाती है। तालिका-64 में प्रभाग के निर्धारित रूप पत्र पर ग्रामवार आधारभूत आंकड़ों को प्रतिवर्ष सर्वेक्षण के आधार पर ग्रामों से विभिन्‍न 41 मदों की ग्राम से सुविधाओं की दूरी दर्शायी जाती है। तालिका-65 में जनपद में रेस्‍ट हाउसेज एवं तालिका-66 में मुद्रणालयों तथा तालिका-67 में विभिन्‍न भाषाओं में प्रकाशित जनपदवार समाचारपत्र/पत्रिकाओं एवं पुस्‍तकों की संख्‍या प्रकाशित कराने का प्राविधान है। मण्‍डलीय सांख्यिकीय पत्रिका का प्रकाशन वर्ष 1981 से प्रतिवर्ष मण्‍डलवार किया जा रहा है। जिला सांख्यिकीय पत्रिका में प्रकाशित की जा रही तालिकाओं में से 2 तालिकायें (ग्रामीण एवं नगरीय फुटकर भावों पर आधारित) को छोड़कर सभी 65 तालिकाओं को मण्‍डलीय सांख्यिकीय पत्रिका में सम्मिलित किया गया है। जिला एवं मण्‍डल की सांख्यिकीय पत्रिका के प्रकाशन में सूचनाओं के स्‍तर अलग-अलग है। जिला सांख्यिकीय पत्रिका में विकास खण्‍डवार एवं जिलास्‍तर की 3 वर्ष की सूचनायें प्रकाशित की जाती है जबकि मण्‍डलीय सांख्यिकीय पत्रिका में प्रमुखत: जिला सांख्यिकीय पत्रिका में प्रकाशित जनपदवार सूचनाओं को आधार मानते हुये मण्‍डलीय सांख्यिकीय पत्रिका की अलग-अलग विषयगत तालिकायें तैयार की जाती हैं।

             प्रभाग द्वारा विकास खण्‍ड सांख्यिकीय पत्रिका का प्रकाशन भी वर्ष 2004 से मैनुअली शुरू किया गया है, जबकि ग्रामवार सूचनायें वर्ष 1973 से संकलित की जाती रही हैं।

             सांख्यिकीय पत्रिका का प्रकाशन वर्ष 1995 से एन0आई0सी0 द्वारा विकसित साफ्टवयेर पर एन0आई0सी0 के जिला केन्‍द्रों के सहयोग से मण्‍डलीय उपनिदेशक/ जिला अर्थ एवं संख्‍याधिकारी कार्यालयों द्वारा किया जा रहा है। इसका प्रकाशन वर्ष 1999-2000 में पायलेट आधार पर योजना आयोग, भारत सरकार द्वारा नियोजन विभाग को दिये गये कम्‍प्‍यूटर्स पर राष्‍ट्रीय सूचना विज्ञान केन्‍द्र द्वारा विकसित विन्‍डो वेस्‍ड साफ्टवेयर की मदद से वर्ष 2003 तक किया गया। वर्ष 2004 से सांख्यिकीय पत्रिकाओं का प्रकाशन एन0आई0सी0 द्वारा विकसित वेबवेस्‍ड साफ्टवेयर SPIDER (Sankhyakiya Patrika Internet Based Data Entry and Retrieval System ) द्वारा सम्‍पन्‍न किया जा रहा है। अब तक वर्ष 1995 से 2015 तक की पत्रिकायें वेबसाइट पर उपलब्‍ध है तथा वर्ष 2016 पर कार्य चल रहा है। वर्ष 2004 तक की पत्रिका जनगणना 1991 के आँकड़ों पर आधारित है तथा वर्ष 2005 से पत्रिका जनगणना 2001 के आँकड़ों पर आधारित है तथा वर्ष 2013 से पत्रिका जनगणना 2011 के आँकड़ों पर आधारित है ।

        जन सामान्य को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ सुगमतापूर्वक पहुचाने तथा प्रशासनिक सुविधा को ध्यान में रखते हुए समय समय पर नए जनपदों एवं मण्डलों का सृजन सरकार द्वारा किया जाता है । वर्ष 2008 में जनपद कासगंज व मण्डल अलीगढ का सृजन किया गया । अतः वर्ष 2009 में 71 जनपदों तथा 18  मण्डलों की सांख्यकीय पत्रिका का निर्माण SPIDER सॉफ्टवेयर के माध्यम से सफलतापूर्वक किया गया । इसी प्रकार वर्ष 2010  में अमेठी जनपद का सृजन होने का कारण वर्ष 2011 में 72 जनपदों तथा 18  मण्डलों की सांख्यकीय पत्रिका का निर्माण SPIDER सॉफ्टवेयर के माध्यम से सफलतापूर्वक किया गया । वर्ष 2012  में तीन नये जनपदों हापुड़, सम्भल व शामली का सृजन होने के कारण वर्ष 2012 से 75 जनपदों तथा 18 मण्डलों की सांख्यकीय पत्रिका का निर्माण  SPIDER सॉफ्टवेयर के माध्यम से  सफलतापूर्वक किया जा रहा है ।   

        स्‍पाइडर मे मानचित्र पर आधारित पत्रिका नामक माडयूल का भी विकास किया गया है, जिसके द्वारा विभिन्‍न मदों के जनपद एवं विकासखण्ड स्‍तर के विगत 17 वर्षो के आंकड़ों को एक साथ देखा जा सकता है तथा Time Series Analysis भी किया जा सकता है। स्‍पाइडर मे पत्रिका पर आधारित एक क्‍वैरी सिस्‍टम का भी विकास किया गया है। इस क्‍वैरी सिस्‍टम की मदद से राज्‍य, जनपद, विकास खण्‍ड एवं ग्राम स्‍तर की अवस्‍थापना सम्‍बन्‍धी सुविधाओं का विभिन्‍न रूपों में अवलोकन किया जा सकता है तथा आर्थिक विषमताओं एवं गत वर्ष की तुलनात्‍मक स्थिति का सुगमता पूर्वक अध्‍ययन किया जा सकता है। सांख्यिकीय पत्रिका के आंकड़ों का उपयोग करते हुये राज्‍य नियोजन एटलस प्रतिवर्ष 2003 से तथा जिला नियोजन एटलस वर्ष 2006 से जी0आई0एस0 तकनीकी का प्रयोग करते हुये बनाये जा रहे हैं। एटलस विवरण नियोजन विभाग की वेबसाइट (http://planning.up.nic.in) से देखा जा सकता है। यह आंकड़े डाटा वेयरहाउस तथा डाटा माइनिंग तकनीकी का प्रयोग करते हुये पैटर्न एनालिसिस तथा निर्णय लेने में काफी उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। सांख्यिकीय पत्रिका में प्रकाशित होने वाले आंकड़ों का उपयोग अर्थशास्‍त्रियों, नियोजकों, नीतिनिर्माताओं, प्रशासकों, शोधकर्ताओं, तथा विकास कार्यो की योजनायें बनाने हेतु किया जाता है। जिससे चरणबद्ध विकास की प्रक्रिया को मूर्त रूप देने में सहायता मिलती है। अधिकांश तालिकाओं में जनपद एवं विकास खण्‍डवार आंकड़े उपलब्‍ध होने के कारण यह पत्रिका जनपद और विकास खण्‍ड स्‍तर की योजना बनाने एवं अन्तर्जनपदीय और अन्तर्विकासखण्‍डीय विषमताओं के अध्‍ययन में सहायक होती है। 73वें एवं 74वें सविधान संशोधन द्वारा पंचायतों एवं नगर पालिका को अधिकार दिये जाने के बाद विकेन्द्रीकृत योजना में जिला, विकास खण्‍ड एवं ग्राम पंचायत स्‍तर पर इन आंकड़ों की काफी उपयोगिता है। वर्तमान परिदृश्‍य में सांख्यिकीय पत्रिका इन्‍टरनेट पर नियोजन विभाग की वेबसाइट पर वर्ष 1995 से उपलब्‍ध करने से इसके उपयोग का क्षेत्र अत्‍यन्‍त व्‍यापक हो गया है और उपयोगकर्ताओं को अपेक्षित सूचनायें सहजता से प्राप्‍त होने लगी है।